कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है?

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कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है?
कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है?

हिन्दू धर्म के मान्यताओं के अनुसार कैलाश मानसरोवर एक पवित्र स्थान है और इसके स्थित कैलाश पर्वत भी मौजूद है, जहां पर भगवान शिव खुद रहते हैं। इसी वजह से हिन्दुओं के लिए यह स्थान सबसे पवित्र और प्रमुख तीर्थ स्थल है। वहीं वैज्ञानिक इसे धरती का केंद्र बताते हैं। आज के इस लेख में हम बताने वाले है कि कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है?

जब भी किसी के मन में कैलाश मानसरोवर का नाम आता है तब उनके मन में बहुत सारे ख्याल आते हैं। उनमे से बहुत सारे ऐसे लोग भी है जो वहां पर जाने के बारे में सोच रहे होंगे। इस पवित्र स्थान पर बहुत सारे लोगों ने यात्रा की है।

कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है?

बहुत सारे लोगों के मन में सवाल होगा कि कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है? तो मैं आपको बता दूं कि तिब्बत में कैलाश पर्वत मौजूद है जो एक पर्वत श्रेणी है। इसी के दक्षिण में मानसरोवर स्थित है, जिसे कैलाश मानसरोवर के नाम से भी जाना जाता है। वहीं इसके पश्चिम में राक्षसताल झील भी स्थित है।

मानसरोवर झील तकरीबन 320 वर्ग किलोमाटर में फैला हुआ है जो समुद्रतल से करीब 4556 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। यहीं से सतलुज, सिन्धु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां बहती है। इस स्थान को हिन्दू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के लोग धार्मिक केंद्र मानते हैं। इसमें तिब्बत के रहने वाले स्थानीय बोनपा लोग भी शामिल है जो इसे धार्मिक और पवित्र स्थान मानते हैं।

कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है? इसके बारे में हमने इस लेख में अच्छी तरह बताने का प्रयास किया है। आगे हम इस आर्टिकल में कैलाश मानसरोवर से जुड़ी कुछ सवाल और उसके जबाब देने वाले हैं जो अधिकतर लोगों का हो सकता है। अगर आपके मन में भी कोई सवाल है तो आगे इस लेख को जरुर पढ़िए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा कहाँ है?

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर बहुत सारे लोग जा चुके है। इसकी यात्रा सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल से शुरू होती है। इसके अलावा नेपाल की राजधानी काठमांडू से भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा की शुरुआत होती है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा में कितना खर्चा आता है?

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कई रास्ते हैं और उन सभी रास्तों से जाने पर अलग-अलग खर्चा आता है। अगर आप उत्तराखंड के रास्ते से जाते हैं तो आपको तकरीब एक लाख 80 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है। यदि आप सिक्किम से होकर इस यात्रा पर जाते हैं तो आपको इस के लिए 2 लाख 25 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

कैलाश मानसरोवर भारत से कब अलग हुआ?

जब भारत साल 1947 में आजाद हुआ तो उस दौरान एक सवाल उठा था कि कैलाश मानसरोवर हमेशा से भारत का एक हिस्सा रहा है। इस वजह से अब उसे अपने देश में जोड़ देना चाहिए। लेकिन साल 1950 में चीन ने तिब्बत पर हमला करके उसे अपने कब्जे में ले लिया। जिस वजह से कैलाश मानसरोवर पर चीज का कब्ज़ा हो गया। अगर उस दौरान भारत चाहती तो यह काम आसानी से कर सकती है, क्योंकि उस दौरान चीन की सेना उतनी मजबूत नहीं थी। लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरु और चीन के दोस्ती की वजह से उन्होंने तिब्बत का साथ नहीं दिया। इसका नतीजा यही निकला की कैलाश मानसरोवर को चीन अपनी तरफ कर लिया।

निष्कर्ष

इस लेख में हमने कैलाश मानसरोवर कौन से राज्य में है? इसके बारे में जिक्र किया है। इसके अलावा हमने बताया है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा कहाँ है? कैलाश मानसरोवर यात्रा में कितना खर्चा आता है? और कैलाश मानसरोवर भारत से कब अलग हुआ? इन सभी के बारे में आज आपको इस लेख के माध्यम से जानने को मिली है।

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